शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

जीवन का रहस्य

 खोल दे पंख मेरे कहता है परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी है, 
जमीन नहीं है मंजिल मेरी,
अभी पूरा आसमान बाकी है। 
 

नमस्कार मित्रों, आपका बहुत बहुत स्वागत है आपके अपने ब्लॉग dream2bget मे । आज मै आप लोगों को एक बहुत ही अच्छी और कुछ सिखानेवाली कहानी बताऊंगा। बस आप ध्यान से एक एक शब्द पढ़ते जाइये और अपने आप को उस कहानी का एक हिस्सा समझते हुए पढ़ें। तो चलिए शुरू करते हैं ..... तैयार हो जाइये एक अच्छी कहानी का हिस्सा बनन के लिए। यह कहानी एक गुरुकुल की है... गुरुकुल तो आप समझते हैं न ..... जी हाँ वही गुरुकुल जहाँ पुराने जमाने मे बच्चे जंगलो मे किसी गुरुजी के पास शिक्षा प्राप्त करते थे। अब हम आज के समय से सैकड़ो साल पीछे चलते हैं..... अब हम उस दौर मे पहुँच चुके हैं। 


सभी बच्चे गुरुकुल पहुँच चुके हैं गुरुजी ऊँचे पेड़ की जड़ पर बैठे हैं सभी बच्चे गुरुजी को दण्डवत प्रणाम करते हैं.... गुरुजी सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हैं और बैठने के लिए बोलते हैं..... सभी बच्चे बैठ जाते हैं अब गुरुजी शिक्षा देना शुरू करते हैं..... 


गुरुजी:- तो शिष्यों आप सभी अपना अपना घर छोड़कर हमारे पास शिक्षा प्राप्त करने आये हो। मै तुम्हे आज कुछ बोल कर नहीं बल्कि करके दिखाऊँगा जिससे तुमसब जिंदगी के एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू को समझोगे। 


सभी बच्चे:- जी गुरुजी। 


गुरुजी:- बहुत अच्छा, आप सब मेरे साथ आज जंगल मे घूमने चलोगे वही कुछ सीखेंगे । 


फिर गुरुजी सबको लेके जंगल मे चल देते हैं सभी बच्चे गुरुजी के पीछे पीछे चलते हैं कुछ दूर जंगल मे चलने के बाद गुरुजी एक अंकुरित बीज को देखते हैं और रुक जाते हैं..फिर बच्चों से बोलते हैं। 


गुरुजी:- आपलोगों मे से कोई इस अंकुरित बीज को उखाड़ सकता है। 


एक छोटा सा लड़का :- गुरुजी आपकी आज्ञा हो तो मै उखाड़ सकता हूँ। 


गुरुजी:- जरूर आज्ञा है उखाड़िये। 


वह लड़का उस अंकुरित बीज को उखाड़ देता है फिर गुरुजी सभी बच्चों को साथ आगे बढ़ते हैं, कुछ दूर और जंगल मे चलने के बाद गुरुजी एक नन्हा सा पौधा जो अभी अंकुरित बीज से थोड़ा सा बड़ा हुआ था को देखकर रुक जाते हैं.... और बोलते है इस पौधे को कोई उखाड़ सकता है गुरुजी की बात सुनकर एक दूसरा बालक उनके सामने आता है और गुरुजी की आज्ञा लेता है.... 


बालक:- गुरुजी अगर आपकी आज्ञा हो तो इस पौधे को मैं उखाड़ सकता हूँ। 


गुरुजी:- जी आपको भी आज्ञा है उखाड़िये। 


वह बालक भी उस पौधे को आसानी से उखाड़ देता है, फिर गुरुजी सभी बच्चों के साथ आगे बढ़ जाते हैं। कुछ दूर और आगे बढ़ने के बाद गुरुजी उस नन्हे से थोड़ा बड़े पौधे के पास रुक जाते है और बच्चों मे से किसी एक बालक को उखाड़ने को बोलते है एक बालक उस पौधे को भी उखाड़ देता है लेकिन थोड़ा सा मुस्किल होता है फिर भी कोशिश करके उखाड़ देता है। अब गुरुजी उन सभी के साथ एक बड़े पेड़ के पास पहुचते हैं और बोलते हैं.... 


गुरुजी:- अब आपलोगों मे से कोई इस पेड़ को उखाड़ सकता है।


 सभी बच्चे आश्चर्य से एक दूसरे को देखते हैं लेकिन कोई आगे नहीं आता उस पेड़ को उखाड़ने के लिए। फिर भी गुरुजी के आज्ञा से वे सभी बारी बारी से उस पेड़ को उखाड़ने की कोशिश करते है लेकिन उनका प्रयास असफल रहता है। फिर गुरुजी उन सभी से बोलते है


गुरुजी:- बच्चों आज के इस भ्रमण से हमने क्या सिखा कुछ बता सकते हो। 


सभी बच्चे एक साथ:- नहीं गुरुजी कुछ समझ नहीं आया। 


गुरुजी(मुस्कुराते हुए) :- आप सभी कुटिया पर चलिए वही हम सभी इस ज्ञान को समझेंगे। 


फिर गुरुजी सभी बच्चों को लेकर कुटिया पर लौट आते हैं। सभी बच्चे उत्सुक है यह जानने के लिए की गुरुजी आज क्या सिखाने वाले हैं। गुरुजी बोलना शुरू करते हैँ:-


गुरुजी:-तो बच्चों आप लोग जानना चाहते हो की आज हमलोगो ने क्या सिखा। 


सभी बच्चे एकसाथ:- जी गुरुजी । 


गुरुजी :- ठीक है तो सुनिए। वो जो हम अंकुरित बीज या पौधा या फिर पेड़ आपलोगों से उखाड़ने के लिए बोले असल मे वो हमारी जिंदगी की गलत आदतें या बुराइयाँ है जो हमारे अंदर पनपती है जिस तरह से आपलोग उस अंकुरित बीज को आसानी से उखाड़ दिये उसी तरह अगर हम अपने अंदर की बुराई को शुरू मे ही छोड़ दे तो आसानी से छुट जाती है लेकिन जिस तरह वो अंकुरित बीज पेड़ बन जाने के बाद नहीं उखड़ पाता ठीक उसी तरह अगर हमारे अंदर की बुराई गहरी जड़ बना ले तो उसे उखाड़ना यानि अपने अंदर से निकाल पाना बहुत कठिन होता है। तो आपसब समझे आज का ज्ञान। 


सभी बच्चे एकसाथ :- जी गुरुजी बहुत ही अच्छा ज्ञान मिला आज हमें अपने अंदर की बुराई को शुरू मे ही अपने अंदर से निकाल देना चाहिए वरना उस बुराई की आदत पड़ जाने के बाद हम चाहकर भी उसे अपने से बाहर नहीं निकाल सकते। फिर सभी बच्चे खड़े होकर गुरुजी को दण्डवत प्रणाम करते हैं। 


गुरुजी :- बहुत अच्छा। आप सभी को मेरा आशिर्वाद। 


तो इस कहानी से हमने क्या सिखा वो तो आप देख ही चुके है.... आजकल के युवा सब बचपन से शराब, सिगरेट, तरह-तरह के नशे का शिकार हो रहें है..... जो शुरू मे उन्हे तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन आगे उन्हे बहुत नुकसान पहुँचाता है और जब तक उन्हे यह बात समझ आती तबतक बहुत देर हो चुकी रहती है क्युकि तबतक वे इसका इस कदर आदि हो चुके रहते हैं की चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पाते। 


तो आप यदि मेरे इस आर्टिकल को पुरा पढ़े और यदि आपके पास ऐसी कोई आदत है तो उसे आज ही छोड़ने की कसम खाईये। अगर मेरे आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपमे थोड़ा भी बदलाव आ जाय तो मेरा मेहनत सफल हो जाएगा। 


आपको मेरी कहानी कैसी लगी comment मे जरूर बताइये अगर मेरे से कही कोई त्रुटि हुई हो तो उसे भी जरूर बताइये मै उसे दूर करने का अथक प्रयास करूँगा। 


एक बार फिर से आपको अपना कीमती समय देने के लिए दिल से धन्यवाद। 


माँ सरस्वती की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। 


 





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